फूलों की यह कहानी बहारों ने लिखी, रातों की यह कहानी सितारों ने लिखी, हम नहीं हैं किसी के गुलाम, क्योंकि हमारी ज़िंदगी, बाबासाहब जी ने लिखी!!
बाबा साहब तेरी कलम के बल हम राज करते हैं, तेरी करनी पे बाबा हम नाज़ करते हैं, बदलेगा वक़्त और जमाना भी, जय भीम के उद्घोष से ये आगाज़ करते हैं।
भीम जैसा सूरज अगर निकला ना होता,
हम दलितों के जीवन में ये उजाला ना होता,
मर गये होते युही जुल्म सहकर
अगर हमें भीम जैसा रखवाला मिला ना होता।
दलित समाज सुधारक को बाबा साहेब कहते है।
जलते दीपक बनकर सदा हमारे दिल में रहते है
अमीरों का दिया हर अत्याचार सहा था उसने,
फिर भी दो वक़्त की रोटी भी कमा ना पाया था
अपनी ग़रीबी के आगे, वो बेबस नजर आया था ।
फिर भी दो वक़्त की रोटी भी कमा ना पाया था ।
फ़िर हुआ एक रोज चमत्कार इस धरती पर,
बनकर मसीहा, ख़ुदा धरती पर उतर आया था ।
देश के लिये जिन्होने विलाश को ठुकराया था।
गीरे हुये को जिन्होंने स्वाभिमान सिखाया था।
जिसने हम सबको तूफानों से टकराना सिखाया था।
देश का वो था अनमोल दिपक जो बाबा साहब कहलाया था।