>>234079
कहाँ तक ये मन को अंधेरे छलेंगे
उदासी भरे दिन कभीं तो ढलेंगे
कभी सुख कभी दुख, यही ज़िंदगी हैं
ये पतझड़ का मौसम घड़ी दो घड़ी हैं
नये फूल कल फिर डगर में खिलेंगे
उदासी भरे दिन कभीं तो ढलेंगे
>>234086
प्यार की गलियाँ
बागों की कलियाँ
सब रंगरलियाँ पूछ रहीं हैं
प्यार की गलियाँ बागों की कलियाँ
सब रंगरलियाँ पूछ रहीं हैं
गीत पनघट पे किस दिन गायेगी तू
मेरे सपनों की रानी कब आयेगी तू
आई रुत मस्तानी कब आयेगी तू
बीती जाये जिंदगानी कब आयेगी तू
चली आ तू चली आ
मैं आवाज़ हूँ तो तू है गीत मेरा
मैं आवाज़ हूँ तो तू है गीत मेरा
जहाँ से निराला मनमीत मेरा
मिल जाएँ इस तरह, दो लहरें जिस तरह
हो, मिल जाएँ इस तरह, दो लहरें जिस तरह
फिर हों ना जुदा, हाँ, ये वादा रहा
तू-तू है वही दिल ने जिसे अपना कहा
तू है जहाँ, मैं हूँ वहाँ
अब तो ये जीना तेरे बिन है सज़ा
>>234100
हम्म फूलों के रंग से दिल की कलम से
तुझको लिखी रोज़ पाती
कैसे बताऊँ किस किस तरह से
पल पल मुझे तू सताती
तेरे ही सपने लेकर के सोया
तेरी ही यादों में जागा
तेरे खयालों में उलझा रहा यूँ
जैसे के माला में धागा
हाँ बादल बिजली चंदन पानी
जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार
हाँ इतना मदिर इतना मधुर
तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार
>>234105
बसने लगे आँखों में
कुछ ऐसे सपने
बसने लगे आँखों में
कुछ ऐसे सपने
कोई बुलाए जैसे
नैनों से अपने
नैनों से अपने
ये समा
समा है दीदार का
किसी के इंतज़ार का
दिल ना चुराले कहीं मेरा
मौसम बहार का
तुझसे मिलते ही वो कुच्छ
बेबाक हो जाना मेरा
तुझसे मिलते ही वो कुच्छ
बेबाक हो जाना मेरा
और तेरा दाँतों में
वो उंगली दबाना याद है
हमको अब तक आशिक़ी का
वो ज़माना याद है
चुपके चुपके रात दिन
आँसू बहाना याद है